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किसानों के खरा सोना साबित हो रहा है ‘काला गेहूं’, मिल रहा है तीन गुना ज्यादा कीमत

चौपाल न्यूज नेटवर्क

लखनऊ

खेती अब घाटे का सौदा न होकर मुनाफे का रोजगार बनती जा रही है। पारंपरिक तरीकों और बीजों से हटकर  आधुनिक तरीके व बीजों से की जाने वाली खेती ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है काला गेहूं की खेती करने वाले किसानों के साथ। काला गेहूं की खेती से किसानों के लिए अच्छा फायदा हो रहा है। इस गेहूं की सबसे अच्छी बात है कि इसकी पैदावार अच्छी होने के साथ-साथ बाजार में दाम भी ज्यादा मिल रहा है। जानकारों की मानें तो काला गेहूं की खेती किसान और किसानी दोनों के लिए शभ संकेत है।

कृषि प्रधान हमारे देश  में आज भी पारंपरिक खेती का ही बोलबाला है। हालांकि किसानों में जागरूकता आया है और अब किसान पारंपरिक खेती से हटकर अलग-अलग प्रयोग करने में हिचक नहीं रहे हैं। उन किसानों के लिए काला गेहूं किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहा है। जानकारों की मानें तो पारंपरिक बीज से अलग काले गेंहू का शोधित बीज अपनाने पर निश्चित रूप से उपज के साथ आय में भी इजाफा हो सकता है। 

यह केवल कही सुनी बातें नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश  के भी कई किसान काला गेहूं की खेती कर बंपर कमाई कर रहे हैं। काले गेहूं की फसल को कृषि विभाग के अधिकारी अच्छा संकेत मान रहे हैं। कृषि अधिकारी मानते हैं कि ये गेहूं डायबिटीज वाले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धीरे-धीरे काला गेहूं की फसल की बुवाई का रकबा बढ़ रहा है। जो किसानों के उत्थान के लिए एक अच्छा संकेत है।

खेती-किसानी मामले के जानकार लोगों का कहना है कि मौजूदा समय काला गेहूं खेती के लिए उपयुक्त है। क्योसंकि इसकी खेती के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। किसान 30 नवंबर तक की इस गेहूं की बुवाई आसानी से कर सकते हैं। अगर इसकी बुवाई देर से की जाए। तो फसल की पैदावार में कमी आ जाती है। जैसे-जैसे बुवाई में देरी होती है। वैसे-वैसे गेहूं की पैदावार में गिरावट आ जाती है।

उत्तर प्रदेश  के रायबरेली में पिछले साल महज आठ किसानों ने काला गेहूं की खेती की थी। लेकिन इस साल लगभग करीब 100 से अधिक किसानों ने काला गेहूं की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी खेती की खासियत यह है कि फसल का न सिर्फ उत्पादन अधिक होता है। बल्कि यह मार्केट में 4,000 से 6,000 हजार रुपए प्रति क्विंटल की कीमत पर बिकता है। जो कि अन्य गेहूं की फसल से दोगुना है। इसी साल सरकार ने गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,975 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस हिसाब से देखें तो काला गेहूं की खेती से किसानों की कमाई तीन गुना तक बढ़ जाती है। किसान इस नस्ल की बीज बोकर अपनी अच्छी कमाई कर सकते हैं।

बोआई की बात करें तो किसानों को काला गेहूं की बुवाई सीडड्रिल से करनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा करने से उर्वरक और बीज की अच्छी बचत की जा सकती है। काला गेहूं की उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही होता है। इसकी पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघे होती है। किसान बाजार से बीज खरीद कर बुवाई कर सकते हैं। यह सीजन इसकी बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है।

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