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जितिन प्रसाद की अगुआई में लामबंद होते ब्राह्मण युवा

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे ब्राह्मणों को अब कांग्रेस में भरोसा, जितिन प्रसाद की अगुवाई में लामबंद हो रहे हैं यूपी के बाभन

अशोक मिश्रा

(आरएनएस) 

कहा जाता हैं कि भारत की राजनीति में बिना उत्तर प्रदेश को साधे कोई भी प्रधानमंत्री नही बन सकता कमोबेश ये बात ठीक भी हैं।1990 तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का ही बोलबाला रहा हैं । उत्तर प्रदेश के अबतक के इतिहास  में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री दिया। जिसमें गोबिंद बल्लभ पंत, श्री पति मिश्र, सुचेता कृपलानी, नारायण दत्त तिवारी, हेमवती नंदन बहुगुणा प्रमुख रहे। जबसे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कमजोर हुई  और नेतृत्व का संकट गहराता गया लिहाजा ब्राह्मण समाज जो कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक था जगह जगह बिखर गया।

विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद ब्राह्मण समाज उद्वेलित हुआ नतीजतन सरकार व बिपक्ष दोनों ब्राह्मणों को साधने में लग गए। भारतीय जनता पार्टी से नाराज ब्राह्मण किस करवट बैठेगा यह प्रश्न भविष्य के गर्त में अनुत्तरित हैं। भाजपा में 58 ब्राह्मण विधायको के बावजूद भी कोई ऐसा चेहरा नही जिसके पीछे ब्राह्मण खड़े हो सके। वर्तमान में सभी दलों ने अपने ब्राह्मण चेहरे को आगे कर के ब्राह्मणों को रिझाने की हर संभव कवायद शुरू कर दी हैं। प्रदेश में आबादी के लिहाज से ब्राह्मण 14% हैं जो कि निर्णायक हो सकते हैं। ब्राह्मण समाज खुद तो वोट देता ही हैं साथ मे समाज मे माहौल भी बनाता हैं जिससे अन्य जातियों के वोट भी मिलते हैं जिसका फायदा भाजपा को मिलता रहा हैं। प्रदेश में अल्पसंख्यकों के बाद एनकाउंटर में मारे जाने वालों में ब्राह्मणों की संख्या दूसरे नंबर पर हैं। मंडल कॉमिशन लागू होने के बाद से उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति हावी रही जिसके नतीजे में सपा, बसपा ने उत्तर प्रदेश की शीर्ष सत्ता प्राप्त की। सत्ता शाशन से उपेक्षित ब्राह्मण समाज मे भी पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों के भी निशाने पर हैं। हालांकि ब्राह्मणों को इकट्ठा करना मेढक तौलने जैसा ही हैं ऐसा बहुत कम ही होता हैं कि ब्राह्मण एक जगह इकट्ठा हो। पूर्व मंत्री कांग्रेस जितिन प्रसाद के प्रयास ने अब रंग दिखाना सुरु कर दिया हैं।

बीते दिनों में जिस तरह से श्री प्रसाद सक्रिय रहे हैं उसका नतीजा अब जमीन व सोशल मीडिया पर दिखने लगा हैं। ब्राह्मण नेताओं में सबसे आकर्षक व्यक्तित्व जितिन प्रसाद का ही हैं शायद इसी वजह से ब्राह्मण जितिन प्रसाद को अपने नेता के रूप में देखता हैं।खासकर युवाओं में जितिन प्रसाद बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं अब गांव मोहल्ले हर जगह ब्राह्मणों के विमर्श में जितिन प्रसाद व कांग्रेस ही हैं। अगर ब्राह्मण कांग्रेस को चुनता हैं तो वो जितिन प्रसाद को ही मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में चाहेगा।

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